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कथार्चना

299.00

अर्चना अनिल जैन “अन्वेषा”

Book Size- A5

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Description

साहित्यकार की लेखनी जब चलती है ,तो विधा कोई भी हो ,समाज की दशा को उकेरती है और दिशा देने का प्रयास करती है। शर्त बस इतनी होती है कि साहित्यकार ने लेखन किसी सम्मान के उद्देश्य से ना किया हो। सिर्फ और सिर्फ सामाजिक उत्थान के लिए लिखा हो ।लेखन की समस्त विधाओं में कहानियां सदैव सबको प्रिय रही हैं। जीवन के छोटे-छोटे वृतांत को खूबसूरती के साथ एक कथा के सांचे में ढाल देना ,जो रोचकता के साथ गहन चिंतन का विषय बन जाए यही कहानी कार की सफलता को सुनिश्चित करती है ।सरल और ग्राह्य शब्दावली लोगों के हृदय तक उतरती हैं।कहानियां स्वयं से तादात्म्य स्थापित करती है ।

जहां काव्य में प्रत्यक्ष और परोक्ष दो तरह के भाव होते हैं वहां कहानियां सीधी बात करती हैं ।बस वर्तमान को भविष्य के लिए सुरक्षित करने हेतु समग्र भारतवर्ष के रचनाकारों को एक ही पुस्तक में एकत्रित करके विभिन्न विचारधाराओं का एक खूबसूरत सारगर्भित गुलदस्ता बनाने का प्रयास किया है। “कथार्चना” में कथाकारों ने छोटी बड़ी सभी तरह से कहानियों का सृजन किया है। पर एक बात जो सभी मे उपस्थित है वो है कहानियों का अनुपमेय होना।सभी की कहानियां आगे और पढ़ने की जिज्ञासा बढ़ाने में सक्षम हैं।यह पुस्तक निश्चित रूप से संग्रहणीय और कालजयी होगी ऐसी मेरी भावना और आशा है।मां शारदे ने मुझे निमित्त बनाया है ।आप सब का आशीर्वाद प्रतीक्षारत है।

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