शब्दनाद

299.00

रीमा महेंद्र ठाकुर

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Description

शब्दनाद, शब्द जो सहित्यकार की जमापूंजी होती है नाद जो ऊर्जा शक्ति है, जो हर उस ध्वनि से जुडी है ,जो हमारे आसपास मौजूद है! जो हमारे मन विचार में समाहित है! शब्दनाद नाम मेरे मस्तिष्क मे चल रहे मौन विचारों मे समाहित वो सृजन है, जिसका मैंने सतरंगी विधाओं में पिरोया है! अध्यात्म से लेकर जीवन मे घट रही घटनाओं को, मुट्ठी से फिसलती रेत को रोकने की कोशिश की, है,! जब हम सामाज में रहते है, तो हमपर बहुत सारी पाबंदियां भी होती है! उसी समाज मे जी रहे हमारे लोग जो कटु शब्द बोल कर हमें, उद्वेलित करते हैं! जिनके द्धारा बोले गये, तीक्ष्ण शब्द हमे मूक कर देते हैं, जब हम अपने भाव प्रदर्शित नहीं कर पाते, उन्ही भावो की वजह से जन्म होता है, आसुओं का, जिनका वेग इतना तीव्र होता है, की मन उद्वेलित हो जाता है! फिर एक बंवडर के साथ होता है, शब्द नाद,, जी है यही बिषय इस पुस्तक के लिए सही मायने मे सटीक है, जिससे एक सहित्यकार का जन्म होता है! जो अपने भावों को शब्दों के मोती से बांधता है, इस पुस्तक मे यथा सभंव यही कोशिश की गयी है की पाठकों को बांध सके, एंव अपनी एक अलग सी पहचान बना सके, धन्यवाद !

Book Size- A5

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